23Aug2016

आज़ादी का उत्सव जारी है !

सोनिया चोपड़ा

आज़ादी का उत्सव हम सबके लिए ख़ास है. इस साल भारत ने आजादी के 69 वर्ष पूरे कर 70वें साल में कदम रखा है| पूरे हिंदुस्तान में इस खास राष्ट्रीय पर्व को अलग- अलग रंग और अंदाज़ के साथ मनाया गया.

इस अवसर को खास बनाने के लिए 10 अगस्त 2016 को सामुदायिक रेडियो अल्फाज़-ए-मेवात FM 107.8 ने पहली बार जश्न-ए-आज़ादी कवि सम्मेलन का आयोजन मेवात के गाँव घाघस (ब्लाक नगीना) के सामुदायिक केंद्र में किया.

यह कवि सम्मेलन दूसरे कवि सम्मेलनों से काफ़ी अलग था. आयोजक कवि सम्मेलन की तैयारियों में इतने मुशरूफ़ और उत्साहित थे कि नंगे पाँव ही स्टेज सजाने, दर्शकों के बैठने की व्यवस्था कर रहे थे. बड़ा-सा हाल गेंदे के फूलों से सजा था और कवियों के बैठने के लिए भी दूधिया सफ़ेद चादर से ढका एक भव्य मंच बनाया गया था. आइए कवि-उद्गारों से सजी इस महफिल में कोने की एक सीट तलाशते हैं और वाह-वाह -कर तथा ताली बजाकर कवि सम्मेलन का लुफ़्त उठाते हैं। कक्ष कवियों की कविताओं और मुशायरे को सुनने के लिए पूरी तरह से महिलाओं और पुरुषों से भरा था. सम्मलेन का पैमाना और विस्तृत हो जाता है जब दिल्ली, अलवर और पंचकुला से आये मेहमान भी इसमें शिरकत करते हैं.

निज़ामत और दर्शक ज़बरदस्त उत्साह और तालियों के साथ मेवात के कवि इलियास प्रधान, फौज़ी उसमान, मास्टर अशरफ, डॉ. अशफ़ाक आलम, डॉ. माजिद खान, शफ़ी मोहम्मद का स्वागत परंपरागत मेवाती पगड़ी पहनकर करते है और मुमताज़ शाजिद और मुमताज़ परवीन जैसी शायारओं को मेवाती चुनरी भेंट स्वरुप प्रदान की गयी.
कवि सम्मेलन का आगाज नियामत अली (मेवाती लोक गायक) ने देश भक्ति से ओतप्रोत गीत से किया. मुशायरे की निज़ामत अश्फाक आलम ने शयारा मुमताज़ शाजिद को बुलाकर की. शयारा मुमताज़ ने देशभक्ति और वीर रस में पिरोई कविता सुनाकर दर्शकों का मन मोह लिया.

मेवाती मशहूर शायरा मुमताज़ परवीन की इन चंद लाइनों की शायरी का अंदाज़ ही अलग था, जिसको सुनकर सभी में देशभक्ति की भावना का जज़्बा जगा दिया:-
हवा जब तक रहे दोस्ती रखना
हवा जब आंधी बन जाये तों बगावत भी ज़रूरी है,
पुरखों के समझोते को ही
इबादत समझ लिया,
उनसे भी कह दो अपनी
बात पर रहे,
मिट्टी नहीँ हम जो पानी में
बह जाये,
सैलाब से कह दो अपनी
औकत में रहे

इसी तरह सभी आमंत्रित कवियों ने कविताओं और शायरों के ज़रिये मेवात के वीर सेनानियों की आज़ादी की लडाई में भागेदारी और साहस से जुड़ी गाथाएँ सुनाई और साथ ही अपनी रचनाओं के माध्यम से जिम्मेदार अल्फाजों और विचारों की आज़ादी के प्रति भी समा बांधा.
देशभक्ति का जनून कुछ इस कदर जगा कि मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र सिंह, चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट, मेवात ने भी सरकारी कार्यक्रमों और स्कीमों के बारे में जानकारी कविता के ज़रिये कुछ इस तरह दी:-
खरीद फरोख्त या अत्याचार
का जो भो हो साथी,
हम सब मिलकर काम करे,
तों उनकी जेल लाजमी हो.

इस कवि सम्मेलन ने कक्ष में बैठे सभी लोगों को मेवात की संपन्न और विख्यात रचनाओं से रूबरू होने का मौका दिया और कवियों को एक ऐसा मंच दिया जहां वे अपनी कविताओं के ज़रिये आज़ादी के महत्व और उस आज़ादी को सजोने के प्रति हम सबकी जिम्मेदारियों का भी बखान कर रहे थे. हम सबका फ़र्ज़ है कि हम सभी मिलकर आज़ादी की अहमियत को समझे और अपने अधिकारों की मांग से पहले जिम्मेदारियों को निभाये.

दर्शक कवियों की कविताओं में इतने मंत्रमुग्ध थे कि उनको एहसास ही नहीं हुआ की कैसे 2 घंटे 45 मिनट का शायरना कवि सम्मलेन नियामत अली के देशभक्ति से भरे गीत और तालियों की जोशीली आवाज़ के साथ समाप्त हुआ.

ऐसा माना जाता है विचारों में बहुत ताकत होती है. जब विचारों को अल्फाजों के धागे में पिरोया जाए और शायराना अंदाज़ और जोशीले आवाज़ की माला बनाकर सुनाया जाये, तों वो हर सुनने वाले के दिलोदिमाग पर अपनी एक अनोखी और यादगार छाप छोड़ जाती है.

कवि सम्मेलन से वापिस आते समय मैं भी अपने साथ कवियों की कविताओं और शायरी की बहुत – सी यादे अपने साथ लेकर आयी हूँ. मैंने भी प्रण लिया कि मैं अपने कर्तव्यों को निभाने का आगाज आज से ही और अपने घर से ही सबसे पहले करुगी, क्योंकि मेरी यह पहल धीरे-धीरे मुझे बड़ी जिम्मेदारियों की तरफ़ लेकर जाएगी. ऐसी उम्मीद करती हूँ कि आप भी इस लेख को पढ़ने के बाद अपने जीवन में कोई नई सकारात्मक शुरूआत ज़रूर करेगें और इसी तरह ज़ारी रहेगा आज़ादी का जश्न, क्योंकि विचारों और अल्फाजों में बहुत ताकत होती है.
“जय हिन्द, जय भारत”!